आपदा को अवसर में तब्दील


हम विकास की बात सोचते ही अपने सामने कम संसाधन का हवाला देकर राह ढूंढ़ना छोड़ देते हैं।अगर यह पौधा भी उपजाऊ भूमि का नहीं होने का रोना रोकर खुद को सुखा लेता तो क्या इस विकट वातावरण में फल दे पाता!

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