किसी भी भाषा पर उचित समझ रखने व सही पकड़ बनाने के लिए इनकी व्याकरण की जानकारी रखना अति आवश्यक है।इस आवश्यकता को पूरा करने के लिए झारखंड का मुख्य जनजातीय भाषाओं में से एक "हो" भाषा के नामचीन शिक्षाविद् डॉ.दासराम बारदा ने एक नायाब तोहफा समाज को देते हुए हो भाषा का व्याकरण"हो बाकणा"के नाम से पुस्तक की रचना की है।यह पुस्तक हो भाषा के माध्यम से केरियर निर्माण का सपना संजोए विद्यार्थियों के लिए काफी सहायक सिद्ध होगा।साथ ही,प्रशासनिक अधिकारी व पदाधिकारियों के लिए भी यह पुस्तक सहायक सिद्ध होगा,जब सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में विकासोन्मुख सरकारी योजनाओं के बारे में जानकारी देते हुए स्थानीय भाषा का प्रयोग करना पड़ जाए।
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