नयी शिक्षा नीति मे मातृभाषा

@@मातृभाषा की पुस्तकें प्रकाशन हेतु आयोजित कार्यशाला सम्पन्न@@@
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#रांची:-नई शिक्षा नीति में प्राथमिक विद्यालयों में मातृभाषा से पढ़ाई की अनिवार्यता को लेकर झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद,रांची ने मातृभाषा में पुस्तकें प्रकाशन हेतु तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद रांची के श्री संजीव कुमार तिवारी एवं श्रीमती दीपांजलि गोस्वामी के देखरेख में सम्पन्न हुआ। ज्ञात हो कि बहुत जल्द राज्य के जनजातीय बहुल जिले के लिए मातृभाषा में प्रकाशित पुस्तकों का वितरण किया जाएगा। हालांकि पहली और दूसरी कक्षा के लिए पूर्व में ही पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं।अब पांचवीं कक्षा तक में भी मातृभाषा में पढ़ाई अनिवार्य कर दिया गया है।
पुस्तकें प्रकाशन के पूर्व झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद,रांची ने संथाली, कुड़ुख,मुंडारी, हो और खड़िया जनजातीय क्षेत्रों के लिए विभिन्न जिलों से भाषा जानकार शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति कर भारतीय संचार निगम लिमिटेड, रांची के एडवांस रीजनल टेलीकोम ट्रेनिंग सेंटर में कार्यशाला का आयोजन किया गया। मातृभाषा में पुस्तकें प्रकाशन हेतु आयोजित कार्यशाला में हो भाषा के लिए पश्चिमी सिंहभूम से कृष्णा देवगम, जगदीश सावैयां विद्यासागर लागुरी और मंगल सिंह मुंडा संथाली भाषा के लिए फुदन चन्द्र सोरेन (सरायकेला-खरसावां),रसिक बास्के(दुमका), रजनीकांत मांडी(पूर्वी सिंहभूम)और रवीन्द्र मरांडी(पाकुड़) मुंडारी भाषा के लिए तारकेश्वर सिंह मुंडा,चंपी कुमारी (रांची),चन्द्रवती सारु,नौरी पूर्ति (खूंटी), खड़िया भाषा के लिए रश्मि रेणुका टोप्पो, विक्टोरिया बा,ख्रीस्त जोरेंग टोप्पो,अनिमा रानी टोप्पो और कुड़ुख भाषा के लिए विजय रंजीत एक्का,डॉ.वंदे खलखो का प्रतिनियोजन किया गया था। पहले चरण में शिक्षकों ने पहली से पांचवीं कक्षा के लिए वर्तमान में प्रकाशित हिन्दी,अंग्रेजी, गणित,पर्यावरण विज्ञान के पुस्तकों के कठिन शब्दों का जनजातीय भाषा में अनुवाद किया।ताकि जनजातीय परिवेश से आने वाले विद्यार्थियों को भाषा को लेकर पठन-पाठन में किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।

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