आदिवासी शादी रिवाज

 #हो_दिसुम_कोल्हान_की_सफर_में


कोल्हान मेंं हो आदिवासियों के शादी रिवाजों में महत्वपूर्ण रिवाज मे #बाला (सगाई) एक है। 

दो दिलों को मिलाने के साथ दो परिवारों के रिस्तों को जोड़ने और पहचान कराता है।इसमें आए मेहमानों की काश खातिरदारी होती है।


जो अतिथि सत्कार आदिवासी समाज की महत्वपूर्ण अंग है।इस अवसर मे कजूर के पतों से बिनकर बनाया चटाई मे मेहमानों की खातिर की जाती है।  ऐरे या गोनोङ दोस्तुर पूरा करने के लिए दो चटाई आमने सामने बिछाई जाती हैं। 


लड़के वालों की मुँह सूर्य निकलने की दिशा की ओर और लड़की वालों की मुख चाँद निकालने की दिशा मे होती हैं।जिसमें लड़की के लिए गोनोङ  ₹101 और एंगा बगे (माँ को छोड़ने ) के तीन बैल दिया जाता है।आजकल बैल के बदले रूपये मे बदला जाता है।यह रुपये बकरी की गोबर (मेरोम इः )और धूब घास मे तय किया जाता है। 


होरा बारा यानी आनजाने के दौरान पशु ,पक्षी,पेड़ों की क्रियाकलाप के अनुसार अशुभ और शुभ कृत्रियाँ देखी जाती हैं।ये कृत्रियाँ प्रकृति इंगित करती हैं। प्रकृति की इंगित पर आदिवासियों का अटूट विश्वास इस अवसर पर देखने को मिलती हैं।इसमें कुछ अशुभ और कुछ शुभ होते हैं जो अशुभ कृत्रियाँ होती हैं, देवाँ के द्वारा  पूजा कर काटा जाता है।


1)दारोम डियंग दोस्तुर

2)दारोम सुसुन दारोम दोस्तुर

3)आबुङ दाः दोस्तुर

4)दारोम जोहार दोस्तुर

5)सुकुल पिका दोस्तुर

6) बाला को साज श्रृंगार दोस्तुर

8) उपरूम सह कडसोम बाः दोस्तुर

9)फूल फल की माला दोस्तुर

10)हाडोर दोस्तुर

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