कोरोना काल में आस्था और विज्ञान

 #धर्म और #अतीत के आधार पर आज की #वैज्ञानिक_सोच को नकारना भविष्य के #घातक है।


#कोरोना_बढ़ने_के_पीछे_हमारी_अवैज्ञानिक_सोच_भी..


धार्मिक और जरूरत से ज्यादा आस्था रखना भी इंसानों के कितना खतरनाक हो सकता है,वो वर्तमान समय में पूरे देश में देखने को मिल रहा है। #इन्हीं_के_कारण_देश_में_सदियों_से #बाहरियों_का_राज_रहा_और_अब_उन्हीं_कारणों_से_कोरोना #से_रिकॉर्ड_मौतें_हो_रही_है,जबकि #अमेरिका और #चीन इस महामारी को कोसों पीछे छोड़ कर आर्थिक विकास की और कदम बढ़ा दिए हैं।क्योंकि ये देश आस्था और धर्म से आगे बढ़कर वैज्ञानिक सोच रखते हैं और अपने कर्मों पर ज्यादा विश्वास के कार्य करते हैं, इन्हीं वजयों से ये देश आज हमसे कई आगे निकल गए हैं।

                   हमारे देशवासी #धार्मिक_आस्था और #अंधभक्ति के चक्कर में उल्टे सीधे कार्य करते जा रहे हैं जिसके कारण #कोरोना से #मौतें दिनों-दिन बढ़ते ही जा रहे हैं, जिस समय देश को समय का नजाकत को देखते हुए  #हॉस्पिटल की निमार्ण की आश्यकता है ऐसे समय में आस्था के नाम पर #मंदिरों का निर्माण कराई जा रही है। पिछले कोरोना काल से सीख लेकर अगर आज हॉस्पिटलों का निर्माण हुई होती तो शायद आज #हालत_कुछ_और_होते।

इसलिये वर्तमान समय और परिस्थिति बताती है कि हमें आस्था और अंधभक्ति की वजय वैज्ञानिक सोच रखनी चाहिए।


वैज्ञानिक सोच का मतलब होता है नए जबाब तलाशकर समय के साथ बदलना,न कि अतीत के विज्ञान से चिपके रहना।

विडंबना है कि हम बच्चों को स्कूल ,कोचिंग में विज्ञान पढ़ाते हैं,लेकिन वैज्ञानिक सोच को लागू करना नहीं चाहते।


कोरोना की दूसरी लहर के वावजूद लाखों लोगों ने हरिद्वार के कुम्भ में डुबकी लगाई। इस वजय से #पूरी_दुनिया_हम_पर_हंसी क्योंकि जब लाखों केस  रहे थे,तभी लोग नदी के घाटों पर थे।


इसके अलावा इसी समय में #सरकार राजनीतिक #सभाओं,#रैलियों में #अंधाधुंध_भीड़ जुटा कर अपना ताकत दिखा रही थी, जबकि यही जगह उन्हीं कोरोना को अपनी ताकत दिखाने थी। इस समय अगर सरकार कोरोना को अपनी ताकत के बल पर हराती तो कुछ बात होती।


वे रैलियां में हजारों, लाखों लोग इकट्ठा करते हैं और आम लोगों से कहते हैं चार से ज्यादा लोग इकट्ठा होंगे तो वायरस फैलेगा।ठीक है पाबंदियां होनी चाहिए, बाजार भी बंद होनी चाहिए, क्योंकि जान है तो जहान है। लेकिन इतनी पाबंदियां, अगर जरूरी है तो चुनाव जरूरी कैसे हो सकता हैं..?

ये क्यों रोके नहीं जा सकते।


इस प्रकार देखा जाय तो धार्मिक आस्था ,अंधभक्ति के साथ-साथ #सरकार और #चुनाव_आयोग भी कम #जिम्मेदार नहीं है #देश_को_कोरोना_के_आगोश_में_भरने_के_लिए।


आस्था और विज्ञान, दोनों अपनी-अपनी जगह है।आस्था में धर्म और संस्कृति को सबसे ऊपर बताना पूरी तरह अवैज्ञानिक है। इससे आज की समस्या हल नहीं होगी।जो काल्पनिक अतीत में जीते हैं, वे निष्क्रिय हो जाते हैं।जबकि प्रगति उन्हें मिलती है,जो भविष्य में जीते हैं। हमें नई खोजों के प्रति जिज्ञासा रखने और उनके कारण बदलने की इच्छा रखने चाहिए।


#तभी_देश_का_सुनहरे_दौर_फिर_से_वापस_आएगा।

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